Saturday, 24 October 2026

तस्वीरों से पहचाने कितना पुराना है इंदौर

 आजादी से पहले का इंदौर । तस्वीरों से पहचाने कितना पुराना है इंदौर

इंदौर का इतिहास 1715 में स्थानीय ज़मींदारों ने इन्दौर को नर्मदा नदी घाटी मार्ग पर व्यापार केन्द्र के रूप में बसाया था। पहले इन्दौर का नाम इन्दुर था लेकिन 1700 41 ईसवी में बने इंद्रेश्वर मंदिर के चलते इंदौर नाम बदलकर इंदौर पड़ गया. मध्य प्रदेश का इंदौर शहर करीब 18 वीं सदी क्या आस-पास मल्हार राव होलकर मैंस्थापित किया था. इंदौर का इतिहास इंदौर के इतिहास से पता चलता है कि शहर के संस्थापकों के पूर्वज मालवा के वंशानुगत जमींदार और स्वदेशी भूस्वामी थे। इन जमींदारों के परिवारों ने शानदार जीवन व्यतीत किया। उन्होंने होल्कर के आगमन के बाद भी एक हाथी, निशान, डंका और गाडी सहित रॉयल्टी की अपनी संपत्ति को बनाए रखा। उन्होंने दशहरा (शमी पूजन) की पहली पूजा करने का अधिकार भी बरकरार रखा। मुगल शासन के दौरान, परिवारों को सम्राट औरंगज़ेब, आलमगीर और फ़ारुक्शायार ने अपने जागीर के अधिकारों की पुष्टि करते हुए, सनद दी। मध्य प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र पर स्थित इंदौर, राज्य के सबसे महत्वपूर्ण वाणिज्यिक केंद्रों में से एक है। इंदौर का समृद्ध कालानुक्रमिक इतिहास गौर करने लायक है। योर के दिनों में भी यह एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र था। लेकिन आज कॉर्पोरेट फर्मों और संस्थानों के प्रवेश के साथ, इसने देश के वाणिज्यिक क्षेत्र में एक बड़ा नाम कमाया है। जैसे ही कहानी आगे बढ़ती है, होलकर कबीले के मल्हारो होल्कर ने 1733 में मालवा की विजय में अपनी लूट के हिस्से के रूप में इंदौर को प्राप्त किया। उनके वंशज, जिन्होंने मराठा संघ के मुख्य भाग का गठन किया, पेशवाओं और सिंधियों के साथ संघर्ष में आए और जारी रखा गोर की लड़ाई। ईस्ट इंडिया कंपनी के आगमन के साथ इंदौर के इतिहास में एक तीव्र मोड़ आया। इंदौर के होलकरों ने 1803 में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में भाग लिया था। उनकी महिमा धूल से चकित हो गई थी जब वे अंततः 1817- 1818 में तीसरे एंग्लो मराठा युद्ध में मारे गए थे। होलकर राजवंश को हार का सामना करना पड़ा और एक बड़ा हिस्सा छोड़ना पड़ा। उनके अधीन प्रदेशों का। मामले तब चरम पर आ गए जब अंग्रेजी ने उनके उत्तराधिकार में हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया। उत्तराधिकारियों में से दो रहस्यमय परिस्थितियों में बच गए। इंदौर का इतिहास भारत की स्वतंत्रता तक दिनों के अनुसार और गहरा होता गया जब 1947 में भारत के प्रभुत्व में राज्य आया। राजवाड़ा यह नगर के बीचोबीच स्थित है। १९८४ के दंगों के समय इसमें आग लग जाने से इसको बहुत क्षति पहुँची थी। उसके बाद इसको कुछ सीमा तक पुनर्निर्मित करने का प्रयत्न किया गया।रजवाड़ा महल, इंदौर पर्यटन के प्रमुख आकर्षणों में से एक है। राजवाड़ा, होलकर राजवंश के शासकों की ऐतिहासिक हवेली है। इस महल का निर्माण लगभग 200 साल पहले हुआ था और आज तक यह महल पर्यटकों के लिए एक विशेष आकर्षण रखता है। इस महल की वास्‍तुकला, फ्रैंच, मराठा और मुगल शैली के कई रूपों व वास्‍तुशैलियों का मिश्रण है। यह इमारत, शहर के बीचों-बीच शान से खड़ी है जो सात मंजिला इमारत है। इस महल का प्रवेश बेहद सुंदर व भव्‍य है। एक महान तोरण, महल के प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है। लकड़ी और लोहे से निर्मित राजसी संरचना से बना महल का प्रवेश द्वार यहां आने वाले हर पर्यटक का स्‍वागत करता है। यह पूरा महल लकड़ी और पत्‍थर से निर्मित है। बड़ी – बड़ी खिड़कियां, बालकनी और गलियारे, होलकर शासकों और उनकी भव्‍यता का प्रमाण है। इंदौर आने वाले हर पर्यटक को रजवाड़ा अवश्‍य आना चाहिए।

Wednesday, 14 October 2026

देश की धरती, प्रकृति के नाम — बच्चों के हाथों से हरित भारत का निर्माण

 इंदौर। देशप्रेम केवल शब्दों और नारों तक सीमित नहीं, बल्कि अपनी मातृभूमि की रक्षा और उसके भविष्य को संवारने के प्रयासों में भी दिखाई देता है। इसी भावना को साकार करते हुए Kinderbuds School – संस्कारों की पाठशाला में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु सीड बॉल मेकिंग गतिविधि आयोजित की गई।

इस कार्यक्रम का आयोजन और संचालन सामाजिक कार्यकर्ता राम पागारानी (Ram Paagarani) जी और विद्यालय की प्राचार्या डॉ. दीपीका हसीजा जी ने मिलकर किया। कार्यक्रम में डॉ. धीरज हसीजा जी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और अपने प्रेरणादायक संबोधन के साथ गतिविधि का शुभारंभ किया।

इस दौरान 100 से अधिक बच्चों और अभिभावकों को प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया तथा सामूहिक प्रयासों से 300 सीड बॉल तैयार की गईं। इस पहल ने संदेश दिया कि प्रकृति की रक्षा करना भी राष्ट्रसेवा का महत्वपूर्ण रूप है।

डॉ. दीपीका हसीजा जी का मानना है कि मातृभूमि के प्रति सच्चा समर्पण उसकी धरती को हरा-भरा रखने और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य बनाने में है। बच्चों के हाथों से उठाया गया यह छोटा कदम हरित, जागरूक और जिम्मेदार भारत के निर्माण की दिशा में एक सार्थक प्रयास है।

वहीं, राम पागारानी (Ram Paagarani) जी का मानना है कि, “देश की सेवा केवल बड़े कार्यों से नहीं, बल्कि अपनी धरती को हरा-भरा बनाने जैसे छोटे प्रयासों से भी होती है।”

यह पहल एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि प्रकृति की रक्षा करना भी राष्ट्रसेवा है। आज उठाया गया छोटा-सा कदम आने वाले कल को अधिक हरा-भरा और सुंदर बनाने में योगदान दे सकता है।


Friday, 9 October 2026

महाराजा अग्रसेन जी की महाआरती का सीधा प्रसारण

 । जय अग्रसेन । जय श्री अग्र हरे ।

5150 वीं अग्रसेन जयंती प्रसंग पर इन्दौर में पहली बार माँ गंगा और नर्मदा के तट पर होने वाली आरती की जैसी मनोहारी अग्रसेन महाराज जी की महाआरती....



Thursday, 16 November 2023

मतदाताओं को मिठाई व नगद रुपए देते हुए रंगे हाथों पकड़ा

विधायक जीतू पटवारी को मतदाताओं को मतदान की अपील करने के लिए शराब मिठाई व नगद रुपए के साथ रंगे हाथों पकड़ा है गंगा विहार कॉलोनी में प्रशासन द्वारा कार्रवाई की गई तीन लोग हिरासत में वाहन जप्त...



Wednesday, 15 November 2023

ऐतिहासिक स्वागत मोदी जी का

 क्या लाजवाब रोड शो.... इंदौर मे मोदी जी का

ऐसा ऐतिहासिक स्वागत मोदी जी का शायद ही हिंदुस्तान में कहीं हुआ होगा...





Monday, 2 October 2023

टेम्पो से मेट्रो और जमीन से चाँद तक पहुँचे हम....!

 मेरा इंदौर शहर अब बैलगाड़ी और तांगों की सवारी नहीं करता... अब वो हवा से बात करता हैं, जमीन से चाँद तक जाता हैं... मनोरंजन की दुनिया में भी वो 5 जी की स्पीड अपनाता हैं... मेरा शहर अब बदलता नजर आता हैं... जमीन से मेट्रो देखता हैं... तकनीक से चाँद की जानकारी जुटाता हैं... चाँद पर तिरंगा लहराता हैं... ब्रह्माण्ड को नाप 300 से अधिक देशों में अपने नाम का डंका बजाता हैं... मेरा देश, शहर अब बैलगाड़ी, तांगों में नहीं मेट्रो में सफर कर अब फुले नहीं समाता हैं... विजन हो तो हर चीज में कामियाबी मिल जाती हैं... जज्बा अगर हो तो पानी में भी सुरंग बन जाती हैं... हमारे देश की इस तरक्की ने भारत को नया मुकाम दे दिया... दुनिया के नक्शे में भी अपना अलग नाम हो गया... ओद्योगिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर शहर ने सारे विश्व में अपनी अलग छाप छोड़ी हैं... स्वास्थ्य, सफाई, वायु प्रदूषण में भी नंबर वन आकर हर इंदौरी की छाती 56 की हैं...



Monday, 18 September 2023

6 दिसंबर 1992 बाबरी मस्जिद विध्ववंश का असली वीडियो

 अभी तक आपने टीवी न्यूज में रिपोर्ट देखी होगी...

आज हम सभी को 6 दिसंबर 1992 बाबरी मस्जिद विध्ववंश का असली वीडियो दिखाते हैं, जो आपने नहीं देखा होगा, ये दिन हम हिंदुओं के लिए शौर्य दिवस होता है इसके लिए कारसेवकों तथा अनेक शूरवीरों ने आहुति दी है, उन्हें कोटि कोटि नमन...